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मृत्यु का उत्सव

April 11, 2022

कपिला नगरी के राजा देवराज अपने मंत्री के ज्ञान व उन्नत चेतना से अधिक खुश नहीं थे। एक बार मंत्री के जन्मदिवस समारोह के अवसर पर सब खुशी से झूम रहे थे कि तभी कुछ सैनिक राजा का संदेश लेकर पहुंचे और बोले- 'आज शाम को मंत्री को फांसी दी जाएगी।' यह सुनकर समारोह में उदासी छा गयी। मंत्री के मित्र, संबंधी आदि सभी रोने लगे।

मगर मंत्री आराम से संगीत व नृत्य का आनंद लेते रहे। ऐसा लगता था जैसे उन्होंने कुछ सुना ही नहीं। यह सोचकर सैनिकों ने फिर से राजा का संदेश सुनाया तो मंत्री ने सैनिकों से कहा 'राजा को मेरी ओर से धन्यवाद देना कि कम से कम मृत्यु से पहले आनंद मनाने के लिए अभी जब कई घंटे शेष हैं। उन्होंने मुझे पहले बताकर मुझ पर बड़ा उपकार किया है। अब मैं अपनी मौत से पहले पूरी खुशी मना सकता हूॅं।' यह कहकर मंत्री फिर से नाचने लगे। यह देखकर सैनिक वापस राजा देवराज के पास पहुंचे।

राजा ने पूछा- 'मौत का संदेश सुनकर मंत्री का क्या हाल था?' सैनिकों ने बताया कि वह तो खुशी से झूम उठे, आपको धन्यवाद देने को कहा है। देवराज ने कल्पना तक नहीं की थी कि मौत की खबर पर कोई खुश हो सकता है।

वह सच जानने के लिए मंत्री के घर पहुंचे तो देखा कि मंत्री खुशी से नाच-गा रहे थे। राजा ने मंत्री से पूछा, 'आज शाम तुम्हारी मौत है और तुम हंस रहे हो, गा रहे हो?' मंत्री ने राजा को धन्यवाद दिया और कहा- 'इतने आनंद से मैं कभी भी न भरा था। आपने मौत का समय बताकर बड़ी कृपा की। मृत्यु का उत्सव मनाना आसान हो गया। यह सुनकर महाराज देवराज अवाक रह गए और बोले- 'जब तुम मौत से व्यथित ही नहीं तो अब तुम्हें फांसी देना बेकार है।'
 
यह कहानी आज के परिपेक्ष में ही है कि हम सभी भय के वातावरण में जी रहे हैं। लेकिन यदि यह ज्ञात हो जाए कि हमारा आने वाला प्रत्येक क्षण वर्तमान क्षण से ही निकलेगा तो फिर मनःस्थिति पूरी तरह से भिन्न हो जाएगी। हमें सदैव स्मरण रहना चाहिए कि यदि हम वर्तमान में चिंतित हैं दुखी हैं तो अगले क्षण भी चिंतित और दुखी ही रहेंगे लेकिन यदि हम इस क्षण आनंदित हैं तो अगले क्षण भी आनंदित ही रहेंगे।